ट्राईफेड का उद्देश्य जनजातियों के परंपरागत कौशल और सांस्कृतिक ज्ञान के आधार पर समान रुप से निष्पक्ष पारिश्रमिक सुनिश्चित करना एवं व्यवसाय के सुअवसर उत्पन्न करना व स्थायी विपणन के माध्यम से आदिवासी समुदायों के जीविकोपार्जन को बढ़ाना है। उक्त कार्य के लिए ट्राईफेड राज्य स्तरीय संगठनों के साथ मिलकर हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए स्वयं के 27 विशेष शोरुमों और 15 कन्साइन्मेंट शोरुमों के माध्यम से आदिवासी उत्पादों का विपणन कर रही है। शोरुमों के विस्तार के क्रम में, ट्राईफेड ने अभी हालही में जी.पी.ओ मुंबई, महाराष्ट्र में और इन्दौर, मध्य प्रदेश में, शिमला, हिमाचल प्रदेश में शोरुमों की स्थापना की है।
प्रदर्शनियाँ:
विकासात्मक दिशा को अपनाते हुए ट्राईफेड ने राष्ट्रीय आदिवासी शिल्प एक्सपो- "आदिशिल्प" का आयोजन करने की शुरुआत की है। आदिवासी शिल्पकारों/समूहों/संगठनों को आदिवासी समृद्व विरासत को प्रदर्शित करने के लिए तथा इस एक्सपो में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इन मेलों का प्रमुख उद्देश्य सीधे कला प्रेमियों से बातचीत करके उनकी इच्छा और वरीयता को जानना व आदिवासियों की प्राचीन शिल्पों को प्रदर्शित करने के लिए आदिवासी शिल्पकारों को सुअवसर उपलब्ध कराना है। यह उन्हें अपने उत्पादों की डिजाईनों को बनाने में मद्द करता है।
दिल्ली हाट में प्रत्येक वर्ष लगातार आयोजित करने के बावजूद ट्राईफेड ने शिमला, हैदराबाद, भोपाल, बंगलौर, जयपुर, नई दिल्ली में आदिशिल्प का आयोजन किया है। इस मेलों में आदिवासी नृत्य प्रस्तुतियाँ भी सम्मिलित हैं। यह समग्र रुप में जनजातीय कला और संस्कृति को पेश करने की कोशिश है, जिसे ग्राहकों द्वारा अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।
अमृतसर, जालंधर और दिल्ली में ट्राईफेड द्वारा आयोजित की गई प्रदर्शनियों को उत्साह जनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई ।
ट्राईफेड भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किए गए पूर्वोत्तर क्षेत्र के नृत्य त्यौहार "आक्टेव" में भी भाग लेता है। ट्राईफेड वर्ष 2008-09 से इस इवेंट से जुड़ा हुआ है। ट्राईफेड पूर्वोत्तर क्षेत्र के शिल्पकारों के मेले का आयोजन करता है और उन्हें अपने उत्पादों का विपणन एवं प्रदर्शित करने का सुअवसर प्रदान करता है। ट्राईफेड गोवा, मुंबई, त्रिवेन्द्रम, पटना सूरत एवं कोलकाता में आयोजित किए गये आक्टेव त्यौहारों में भाग लिया।
अंतरराष्ट्रीय मेलें: ट्राईफेड ने सांता फे यू.एस.ए.फॉक आर्ट मार्केट को चिन्हित किया जहाँ एक ही स्थान पर आदिवासी उत्पादों का विपणन और प्रदर्शन किया जा सके। इस वार्षिक मेले में ट्राईफेड आदिवासी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए फॉक आर्ट मार्केट में भाग लेने के लिए अपने शिल्पकारों का उत्साह बढ़ायेगा। माह जुलाई, 2009 के दौरान सांता फे फॉक मार्केट, यू.एस.ए.में ट्राईफेड को एक स्टॉल आवंटित किया गया था, जहाँ दो दिन के अन्दर लगभग 13.50 लाख रुपये की कीमत के उत्पादों की बिक्री हुई थी ।
ट्राईफेड आदिवासी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 17-26 मार्च, 2011 तक नासर शहर इजेप्ट में आयोजित किए गए कैरो अंतरराष्ट्रीय मेले में भाग लेना चाहता है।
आदिवासी शिल्पकार मेले (टैमस)
ट्राईफेड शिल्पकार समूह/आदिवासी शिल्पकारों से आदिवासी कला और शिल्प को सीधे खरीदने और दूर-दराज क्षेत्रों में रह रहे आदिवासियों तक पहुंचने के प्रयोग के रुप में आदिवासी शिल्प मेला (टैम) का आयोजन करने की एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल के अनुसार, ट्राईफेड राज्य सरकार/संगठनों के साथ मिलकर प्रदर्शनियों में आदिवासी शिल्पकारों को आमंत्रित करते हैं जहाँ वे अपनी वस्तुओं को लाते हैं। ट्राईफेड वस्तुओं के चिन्हिकरण के लिए इन मेलों में अपनी व्यापारिक मंडली को भेजता है जहाँ शोरुमों के माध्यम से विपणन किया जा सके और अधिक विपणन योग्य वस्तुओं को बनाने के लिए आवश्यकतानुसार वस्तुओं में फेर-बदल करने के लिए सलाह भी दी सकें यदि कोई आवश्यकता है तो। इस पहल से न केवल अनोखी आदिवासी कला को खरीदने में मदद मिलेगी बल्कि आदिवासी कैसे ट्राईफेड की गतिविधियों से लाभ पा सकें और ट्राईफेड की गतिविधियों के बारे में भी प्रचार करने में सहायता मिलेगी ।
चालू वर्ष के दौरान, ट्राईफेड ने रिकाँग एवं कीलाँग, हिमाचल प्रदेश, गंगटोक (सिक्किम),वंशदा एवं व्यारा (गुजरात), मॉडला (म.प्र.) और दीमापुर (नागालैण्ड) आदि स्थानों पर सात आदिवासी मेलों का आयोजन किया जिसमें 303 आदिवासी शिल्पकारों ने भाग लिया।
प्रदर्शनियाँ:
विकासात्मक दिशा को अपनाते हुए ट्राईफेड ने राष्ट्रीय आदिवासी शिल्प एक्सपो- "आदिशिल्प" का आयोजन करने की शुरुआत की है। आदिवासी शिल्पकारों/समूहों/संगठनों को आदिवासी समृद्व विरासत को प्रदर्शित करने के लिए तथा इस एक्सपो में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इन मेलों का प्रमुख उद्देश्य सीधे कला प्रेमियों से बातचीत करके उनकी इच्छा और वरीयता को जानना व आदिवासियों की प्राचीन शिल्पों को प्रदर्शित करने के लिए आदिवासी शिल्पकारों को सुअवसर उपलब्ध कराना है। यह उन्हें अपने उत्पादों की डिजाईनों को बनाने में मद्द करता है।
दिल्ली हाट में प्रत्येक वर्ष लगातार आयोजित करने के बावजूद ट्राईफेड ने शिमला, हैदराबाद, भोपाल, बंगलौर, जयपुर, नई दिल्ली में आदिशिल्प का आयोजन किया है। इस मेलों में आदिवासी नृत्य प्रस्तुतियाँ भी सम्मिलित हैं। यह समग्र रुप में जनजातीय कला और संस्कृति को पेश करने की कोशिश है, जिसे ग्राहकों द्वारा अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।
अमृतसर, जालंधर और दिल्ली में ट्राईफेड द्वारा आयोजित की गई प्रदर्शनियों को उत्साह जनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई ।
ट्राईफेड भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किए गए पूर्वोत्तर क्षेत्र के नृत्य त्यौहार "आक्टेव" में भी भाग लेता है। ट्राईफेड वर्ष 2008-09 से इस इवेंट से जुड़ा हुआ है। ट्राईफेड पूर्वोत्तर क्षेत्र के शिल्पकारों के मेले का आयोजन करता है और उन्हें अपने उत्पादों का विपणन एवं प्रदर्शित करने का सुअवसर प्रदान करता है। ट्राईफेड गोवा, मुंबई, त्रिवेन्द्रम, पटना सूरत एवं कोलकाता में आयोजित किए गये आक्टेव त्यौहारों में भाग लिया।
अंतरराष्ट्रीय मेलें: ट्राईफेड ने सांता फे यू.एस.ए.फॉक आर्ट मार्केट को चिन्हित किया जहाँ एक ही स्थान पर आदिवासी उत्पादों का विपणन और प्रदर्शन किया जा सके। इस वार्षिक मेले में ट्राईफेड आदिवासी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए फॉक आर्ट मार्केट में भाग लेने के लिए अपने शिल्पकारों का उत्साह बढ़ायेगा। माह जुलाई, 2009 के दौरान सांता फे फॉक मार्केट, यू.एस.ए.में ट्राईफेड को एक स्टॉल आवंटित किया गया था, जहाँ दो दिन के अन्दर लगभग 13.50 लाख रुपये की कीमत के उत्पादों की बिक्री हुई थी ।
ट्राईफेड आदिवासी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 17-26 मार्च, 2011 तक नासर शहर इजेप्ट में आयोजित किए गए कैरो अंतरराष्ट्रीय मेले में भाग लेना चाहता है।
आदिवासी शिल्पकार मेले (टैमस)
ट्राईफेड शिल्पकार समूह/आदिवासी शिल्पकारों से आदिवासी कला और शिल्प को सीधे खरीदने और दूर-दराज क्षेत्रों में रह रहे आदिवासियों तक पहुंचने के प्रयोग के रुप में आदिवासी शिल्प मेला (टैम) का आयोजन करने की एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल के अनुसार, ट्राईफेड राज्य सरकार/संगठनों के साथ मिलकर प्रदर्शनियों में आदिवासी शिल्पकारों को आमंत्रित करते हैं जहाँ वे अपनी वस्तुओं को लाते हैं। ट्राईफेड वस्तुओं के चिन्हिकरण के लिए इन मेलों में अपनी व्यापारिक मंडली को भेजता है जहाँ शोरुमों के माध्यम से विपणन किया जा सके और अधिक विपणन योग्य वस्तुओं को बनाने के लिए आवश्यकतानुसार वस्तुओं में फेर-बदल करने के लिए सलाह भी दी सकें यदि कोई आवश्यकता है तो। इस पहल से न केवल अनोखी आदिवासी कला को खरीदने में मदद मिलेगी बल्कि आदिवासी कैसे ट्राईफेड की गतिविधियों से लाभ पा सकें और ट्राईफेड की गतिविधियों के बारे में भी प्रचार करने में सहायता मिलेगी ।
चालू वर्ष के दौरान, ट्राईफेड ने रिकाँग एवं कीलाँग, हिमाचल प्रदेश, गंगटोक (सिक्किम),वंशदा एवं व्यारा (गुजरात), मॉडला (म.प्र.) और दीमापुर (नागालैण्ड) आदि स्थानों पर सात आदिवासी मेलों का आयोजन किया जिसमें 303 आदिवासी शिल्पकारों ने भाग लिया।


