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आदिवासियों को  उनकी आय का 60 प्रतिशत भाग एवं दवाईयों और भोजन का 60 प्रतिशत भाग जंगलों से प्राप्त होता है। वन अधिकार अधिनियम 2006 के अनुसार " लघु वन उत्पाद" सभी गैर इमारती लकड़ी, बाँस सहित वन उत्पाद ब्रश वुड, स्टंप, केन, टेसर, कोकून,शहद, मोम, लाख, तेन्दू  एवं तेन्दू के पत्ते, जड़ी बूटिया, जड़े, कंद आदि शामिल हैं।

ट्राईफेड ने लघु वन उत्पाद  के क्षेत्र में निम्नलिखित बृहत गतिविधियों को हाथ …में लिया है।
(1)     व्यावसायिक  प्रशिक्षण, लघु वन उत्पाद संग्राहकों का क्षमता उन्नयन एवं कौशल संवर्द्वन।
(2)    लघु वन उत्पाद विपणन विकास गतिविधि।

    पहली गतिविधि के अंर्तगत, ट्राईफेड गोंद संग्राहकों एवं शहद संग्राहकों के कौशल संवर्द्वन के… लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है। इन प्रशिक्षणों की स्थिति और क्रियान्वयन एजेंसी, लक्ष्य एवं परियोजना क्षेत्र, कार्यप्रणाली के उद्देश्यों को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

    दूसरी गतिविधि के अंर्तगत, ट्राईफेड मशीनों के उपयोग के माध्यम से इमली एवं इसके उत्पाद की गुणवत्ता और मात्रा को बढ़ाने के लिए,  पत्ते से कप/प्लेट बनाने के लिए को प्रशिक्षित करना, निरंतर लाख उत्पादन के लिए लाख की खेती के वैज्ञानिक विधि का प्रदर्शन करके प्रशिक्षित करना, भण्डारण एवं विपणन, मूल्य संवर्द्वन, पैकिंग, श्रेणीकरण, सुखाना/प्राथमिक प्रशंसीकरण, महुआ फूल को बेहतर तरीके से संग्रहण करने के लिए महुआ फूल के संग्राहकों को प्रशिक्षित करने के साथ ही साथ शहद उत्पाद के मूल्य संवर्द्वन को बढ़ावा देती है। इन प्रशिक्षणों की स्थिति को और क्रियान्वयन एजेंसी एवं परियोजना के क्षेत्र और लक्ष्य की कार्यप्रणाली के उद्देश्यों को जानने के लिए  यहाँ पर क्लिक करें............
    प्रतिवर्ष लगभग 55000 टन शहद का उत्पादन होने के साथ ही संसार में भारत का शहद उत्पादन में छठवाँ स्थान है। जंगल में रहने वाले आदिवासियों की एक बड़ी जनसंख्या जंगली शहद के एकत्रीकरण से अपनी जीविका चलाते हैं जो शहद उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है।
    एक अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 120 मिलियन मधुमक्कखी के छत्ते संभावित है जिससे 6 मिलियन से अधिक ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों को स्व- रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं। उत्पादन के मामले में, ये मधुमक्खी के छत्ते लगभग 15,000 टन मधु मोम और 1.2 मिलियन टन से अधिक शहद का उत्पादन कर सकते हैं। जंगली शहद और मधु मोम को उन्नत तरीके से संग्रहित करने से कम से कम 1,20,000 टन शहद और 10,000 टन मधु मोम का अतिरिक्त उत्पादन हो सकता है। इससे लगभग 5 मिलियन आदिवासी परिवारों की आय में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
    वर्तमान में जंगली शहद का विपणन, प्रसंस्करण एवं एकत्रीकरण सुव्यवस्थित नहीं है। आदिवासियों द्वारा प्रचलित तरीके से शहद एकत्र करने से संबंधित व वन्य शहद पर आधारित जानकारियाँ सुगमता पूर्वक उपलब्ध नहीं हैं, इसकी माँग  विपणन एजेंसियों, औद्यौगिक प्रसंस्करण,खरीद एजेंसियों, प्रमुख सोर्सिग क्षेत्र, मधुमक्खियों की प्रजातियों व शहद की विभिन्न किस्मों की स्थिति एवं संबंधित क्षेत्र में पाई जाने वाली वनस्पतियों पर आधारित है, जो इस वस्तु के कुशल और प्रभावी विनियमन व्यापार के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
    विधिवत तरीके से वन्य शहद के विपणन का विकास करने के लिए एवं वन्य शहद के हितधारकों के मध्य सहलग्नता और सहभागिता की आवश्यकता को मद्देनजर रखते हुए, ट्राईफेड ने  एक  "Wild Honey Network"   तैयार करने की पहल की है।
 

चित्रशाला

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